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भोपाल आरटीओ में ‘प्राइवेट कर्मचारियों’ का राज? ऑनलाइन व्यवस्था के बावजूद दलालों का बोलबाला

 


भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) में एक बार फिर व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जब परिवहन विभाग की अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन हो चुकी हैं और कार्यालय में पर्याप्त शासकीय स्टाफ मौजूद है, तब भी यहां प्राइवेट कर्मचारियों और कथित दलालों की सक्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है।

सूत्रों के अनुसार, आरटीओ कार्यालय में कुछ ऐसे लोग खुलेआम बैठकर काम करते देखे जा सकते हैं, जिन्हें न तो शासन ने नियुक्त किया है और न ही वे किसी अधिकृत पद पर हैं। इसके बावजूद वे न सिर्फ परिवहन से जुड़े दस्तावेज संभालते हैं, बल्कि आवेदकों से पैसों का लेन-देन भी करते नजर आते हैं।

चर्चा में एक नाम ‘मजीद खान  विनोद और मीणा का सामने आ रहा है, जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि वह कार्यालय में किसी अधिकारी की तरह काम करता है। बताया जा रहा है कि वह दस्तावेजों की प्रक्रिया से परिवहन कार्यालय में पदस्थ RTO और दो महिला बाबू के लेकर लेन-देन तक में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। वहीं, कुछ अन्य व्यक्तियों को भी अलग-अलग टेबल पर बैठे देखा गया, जिन्हें कथित रूप से निजी कर्मचारी बताया जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि इन प्राइवेट कर्मचारियों की नियुक्ति कथित रूप से कुछ बाबुओं द्वारा की गई है, जिनके माध्यम से पैसों का लेन-देन कराया जाता है। यहां तक कि महिला कर्मचारियों के नाम पर भी निजी लोगों के काम करने की चर्चा है, जो पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है।

जब इस पूरे मामले में आरटीओ जितेन शर्मा से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि ‘माजिद’ नाम का कोई व्यक्ति विभाग में नियुक्त नहीं है। हालांकि, यह सवाल बना हुआ है कि अगर वह अधिकृत नहीं है, तो वह कार्यालय में बैठकर अधिकारियों की तरह काम कैसे कर रहा है। बातचीत के दौरान अधिक जानकारी मिलने से पहले ही कॉल समाप्त हो गई। इसका यह मतलब हुआ कि RTO जितेन शर्मा को उनके कार्यालय में हो रही अनैतिक गतिविधियों के बारे में सब पता है लेकिन इस मामले में साफ तौर पर कुछ कहना नहीं चाहते हैं

गौरतलब है कि भोपाल आरटीओ कार्यालय पहले भी अनियमितताओं और दलाली के आरोपों को लेकर चर्चा में रहा है। समय-समय पर यहां एजेंटों के सक्रिय होने, फाइलों को तेजी से आगे बढ़ाने के बदले पैसे लेने और आम नागरिकों को परेशान करने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

अब एक बार फिर उठे इन सवालों ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। यदि सूत्रों के दावे सही हैं, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आम जनता के साथ सीधा अन्याय भी है।

फिलहाल, पूरे मामले में उच्च अधिकारियों की प्रतिक्रिया और संभावित जांच पर सबकी नजर बनी हुई है। 


अब यह सवाल अभी भी बना हुआ है माजिद कौन? अधिकारी या ‘फर्जी बाबू ? मीना और रवि को किसने परिवहन कार्यालय में अपना प्राइवेट कर्मचारी रखा है इस मामले में जल करेंगे बड़ा खुलासा