राजधानी भोपाल में लगातार बढ़ रहे अपराध अब आम जनता की चिंता का बड़ा कारण बनते जा रहे हैं। हालात यह हैं कि शहर के कई इलाकों में चाकू-छुरी लेकर घूमना जैसे अपराधियों के लिए आम बात बन गई है और बीते कुछ दिनों में छुरीबाजी की घटनाओं में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कानून विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद 7 साल से कम सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी के बजाय नोटिस देकर छोड़ने की व्यवस्था ने अपराधियों के मन से कानून का डर कम कर दिया है। कई मामलों में पुलिस चाहकर भी सख्त कार्रवाई नहीं कर पा रही, और आम जनता को यह लगने लगा है कि पुलिस अपराधियों से मिलकर कार्य कर रही है क्योंकि प्रावधानों के तहत उन्हें 35(3) के नोटिस पर ही आरोपी को छोड़ना पड़ता है और केवल न्यायालय में पेश होने के निर्देश दिए जाते हैं। ऐसे में हर घटना के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराना भी एकतरफा नजरिया हो सकता है, क्योंकि बदले हुए कानूनी ढांचे में पुलिस की भूमिका सीमित होती नजर आ रही है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इन बदलावों का लाभ आम नागरिकों को मिल रहा है या फिर इसका सीधा फायदा अपराधी उठाकर शहर की कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। हाल के इस मामले में कानून की जानकारी ज्यादा कुछ कहना नहीं चाहते क्योंकि उनको भी सिस्टम से मिलकर चलना है लेकिन कम शब्दों में ही उन्होंने नए कानून का पूरा ढांचा स्पष्ट कर दिया है

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